प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गंभीर आरोपों में लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहने की स्थिति में पद से हटाने का प्रावधान करने वाले 130वें संविधान संशोधन विधेयक की समीक्षा कर रही संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) ने शुक्रवार को अपनी मसौदा रिपोर्ट को अपनाने का फैसला फिलहाल टाल दिया। समिति ने माना कि इस विषय पर अभी और व्यापक चर्चा तथा संबंधित पक्षों से अतिरिक्त विचार-विमर्श की जरूरत है।
आखिर रिपोर्ट को अपनाने का फैसला क्यों टाला गया?
समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने बताया कि सदस्यों की राय थी कि मसौदा रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय लेने से पहले और अधिक चर्चा की जानी चाहिए। इसी वजह से रिपोर्ट को अभी स्वीकार नहीं किया गया और प्रक्रिया को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
मसौदा रिपोर्ट में क्या-क्या सिफारिशें थीं?
130वें संविधान संशोधन विधेयक पर गठित संयुक्त संसदीय समिति ने अपनी मसौदा रिपोर्ट में कुल पांच सिफारिशें शामिल की थीं। यह मसौदा हाल ही में समिति के सभी सदस्यों के बीच विचार के लिए वितरित किया गया था।
बैठक में ऐसा क्या हुआ कि टल गया फैसला?
शुक्रवार को समिति की बैठक में मसौदा रिपोर्ट की प्रत्येक सिफारिश पर अलग-अलग मतदान की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान सदस्यों ने महसूस किया कि विभिन्न पक्षों से और सुझाव लेने तथा आपसी विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम निर्णय लेना उचित होगा। इसके बाद रिपोर्ट को अपनाने का फैसला टाल दिया गया।
ओवैसी और सुप्रिया सुले ने असहमति नोट क्यों वापस लिया?
एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी और एनसीपी (शरद पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने शुरुआत में अपने असहमति नोट (डिसेंट नोट) समिति को सौंपे थे। हालांकि, जब समिति ने रिपोर्ट को अपनाने की प्रक्रिया स्थगित करने का निर्णय लिया, तो दोनों नेताओं ने अपने असहमति नोट वापस ले लिए।
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समिति अध्यक्ष ने क्या कहा?
समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति ने सर्वसम्मति से माना कि इस विषय पर संबंधित पक्षों के साथ और अधिक परामर्श की आवश्यकता है।















